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Medicines Generic Vs Branded ( जेनेरिक और ब्राण्डेड दवाइयां) :

  • Writer: lalit sahu
    lalit sahu
  • Jan 22, 2021
  • 6 min read

Generics are off-patented drugs that are bioequivalent to branded medications in terms of dosage, strength, quality, form, effect, intended use, side effects, and route of administration.

पिछले कुछ सालों से जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों पे बहस हो रही है और जेनेरिक दवाईयों के प्रति जागृलुकता लायी जा रही है। यह लेख भी इसी दिशा में एक प्रयास है आशा है की आपको कुछ नया मिलेगा और पसंद आएगा।

"बाजार से गुज़रा हूँ खरीददार नहीं हूँ ..." अकबर इलाहाबादी का ये शेर ब्रांडेड दवाई कंपनियों और दवाई खरीदने वाली आम जनता पे भी थोड़ा बहुत फिट बैठता है। क्योंकि मूल्य चुकाकर जब आप कुछ खरीदते हैं तो आप ग्राहक हैं और यदि आप कुछ मूल्य लेकर कुछ बेंचते हैं तो आप दुकानदार हैं। ग्राहक का लक्ष्य होता है अच्छी चीजें उचित मूल्य पर खरीदना और दुकानदार का लक्ष्य होता है लाभ कमाना।

भारत में दवा का व्यापार बेहिसाब मुनाफे वाला है । क्यूंकीबइसमें मोल - भाव नहीं होता है , ना ही आपको अपनी पसंद के हिसाब से ब्रांड चुनने की आजादी होती है। डॉक्टर की सलाह जो prescrition में होती है वही सर्वोपरि होती है । उससे हटकर अगर कोई बेहतर विकल्प भी चुनें तो सेहत खराब होने पर डॉक्टर की जवाबदेही खत्म हो जाती है। वह दो टूक कह देता है कि आप अपनी मर्जी से दवा लेते हैं तो मैं कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकता । ऐसे में मरीज बेहिसाब महंगी मेडिसिन खरीदने को मजबूर होता है , जबकि बाजार में उसी गुणवत्ता वाली बेहद सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हैं।


Difference between generic drug and Branded जेनेरिक दवा और ब्रांडेड दवाई में अंतर :

सबसे महत्वपूर्ण इनके अंतर को समझें, जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के रासायनिक संघठन बिल्कुल एक समान होते हैं और इस वजह से इनकी क्रियाशीलता और प्रभावशीलता(effectiveness) एक समान होती हैं। किन्तु ब्रांडेड दवाओं में R&D टीम आदि की खोज के द्वारा प्रभावी घटक को और प्रभावी बनाने के लिये दवाओं में अनावश्यक रूप से निष्क्रिय घटक और सब मॉलिक्यूल्स मिलाये जाते हैं, इसका पेटेंट आदि किया जाता है, जिसपर एक्स्ट्रा खर्च होता है सो लागत खर्च मार्केटिंग खर्च मुनाफा आदि को जोड़ने के कारण ब्रांडेड दवाईंयां महंगी हो जाती हैं। जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड दवाओं के पेटेंट के समाप्त होने के बाद ही बाजार में बेचा जा सकता है, जो आमतौर पर पेटेंट अनुमोदन की तारीख से लगभग बीस वर्ष है।


भारतीय दवा बाजार में बिकने वाली लगभग सभी दवाएं ब्रांडेड दवाएं हैं। हालाँकि, खुराक की आवश्यकता, दवा की सुरक्षा, द्रव्यमान द्वारा शक्ति और गुणवत्ता के मानक ब्रांडेड और जेनेरिक दोनों दवाओं में बहुत समान हैं।


भारतीय दवा बाज़ार सन 2020 के 50 बिलियन से 2025 में 100 बिलियन डॉलर का Market साइज होने की उम्मीद किन्तु भारत मे क्या : भारत के घरेलू बाजार में जेनेरिक मेडिसन की खपत कुल दवा बाजार की तुलना में अभी 10 से 18 फीसदी ही है । मुनाफा , कमीशन और उपहार के लालच में दवा कंपनियां , मेडिकल कारोबारी और डॉक्टर कोई भी नहीं चाहता कि जेनेरिक मेडिसन की मांग बढ़े । यद्यपि पूरी दुनिया को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाई सप्लाई करने में भारत का बहुत नाम है और दिसम्बर 2020 की IBEF.org के रिपोर्ट की मानें तो 3000 फार्मा कम्पनियों और 10500 निर्माण यूनिटों के साथ भारत पूरी दुनिया को जेनेरिक दवाइयां निर्यात करने में नम्बर एक स्थान रखता है। किन्तु घरेलू बाजार में जेनेरिक प्रोमोट करने की कोई सार्थक पहल नहीं दिखती है।


Price difference मूल्य का अंतर : जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड दवाइयों से प्रायः 40 से 95% तक सस्ती होती हैं , सो सवाल ये उठता है कि क्या इतना जतद अंतर उचित है? क्या फार्मा उद्योग ज़रूरत से ज्यादा मुनाफा कमाकर आम जनता का शोषण कर रहे हैं? मूल्य में इतना बड़ा अंतर फार्मा और मेडिकल के पवित्र सेवा वाले पेशे को सोने का अंडा देने वाले उद्योग में तो नहीं बदल दे रहा है? चूंकि अंततः ये बढ़ा हुआ मूल्य मरीज ही वहन करता है सो क्या ब्रांडेड दवाओं का व्यापारीकरण नैतिक है?


ब्रांडेड कंपनियों का तर्क : ब्रांडेड कंपनीयां कई बार दावा करती है कि वह किसी दवा को बहुत अधिक कीमत पर इसलिए बेचती है , क्योंकि उसकी रिसर्च पर बहुत खर्च आता है । लेकिन जानकार मानते हैं कि कंपनियों के इस तरह के दावे हमेशा सही नहीं होते वे इसकी आड़ में बेहिसाब मुनाफा कमाना चाहती हैं ।


प्रक्रियागत मूल्य का अंतर: मूल्य में यह अंतर इस कारण भी आता है क्योंकि जैनरिक दवाएं उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं। इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर कंपनियों को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता है। इसलिए एक ही कंपनी की पेटेंट और जैनरिक दवाओं के मूल्य में काफी अंतर होता है। चूंकि जैनरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, अत: वे सस्ती होती हैं, जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वे महंगी होती हैं। कंपनी के मेडिकल रिप्रजेंटेटिव डॉक्टरों को अच्छा खासा कमीशन देते हैं ताकि वे अधिक से अधिक कंपनी की ब्रांडेड दवाईयां ही मरीज को लिखें।


महंगी दवाइयां और आम आदमी की पहुंच से दौर होता इलाज: Medicine और इलाज सबकी पहुंच में होना चाहिए, बीमारी और इलाज के महंगे खर्च से आम परिवार आर्थिक मुश्किलों में पड़ जाता है। तो फिर आवश्यक घटक वाली कम मूल्य की दवाइयां भी इस दुनियां में सुलभ होनी चाहिये । डॉक्टर्स का फ़र्ज़ बनता है कि वो उचित सलाह और अपने सेवा के पेशे के साथ न्याय करते हुऐ मरीज को आवश्यक घटक वाले जेनेरिक दवाईयां prescribe करें।


आम धारण, भ्रम और सच्चाई : जेनेरिक दवाओं के बारे में आम धारणा है कि इनकी गुणवत्ता ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले अच्छी नहीं होती , लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है । जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के बराबर ही गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी होती हैं । लाभ के लिए कई बार डॉक्टर भी जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठा देते हैं , जो बेबुनियाद होते हैं । जानकारी कम होना या जानकारी के अभाव में या ध्रुवित राय रखने की वजह से ऐसा होता है।


Generic Vs Branded Medicine and जन औषधि केंद:

जेनरिक दवाईयां न सिर्फ 95% तक सस्ती होती हैं बल्कि ब्रांडेड दवाईयों के बराबर ही प्रभावकारी होती हैं। मुख्य अंतर सिर्फ उनके साथ किसी बड़ी फार्मा कम्पनी का तमगा नहीं लगा होना होता है। अतः बब्रांडेड मेडिसिन की तुलना में जेनेरिक मेडिसिन खुले बाजार में बहुत ही किफायती और उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं साथ ही इसकी क्वालिटी में किसी तरह की कमी नहीं हैं क्योंकि मूल फार्मूला और साल्ट same ही होता है। जेनेरिक दवाइयों को आसानी से जनता तक पहुंचाने के लिए 2015 से जनऔषधि केंद्र खोले जा रहे हैं और अब सभी जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ये जनऔषधि केंद्र संचालित हैं।

ज्यादा लाभ के चक्कर में डॉक्टर और कंपनियां लोगों को इस बारे में कुछ बताते नहीं हैं और जानकारी के अभाव में गरीब भी केमिस्ट से महंगी दवाएं खरीदने को विवश हैं।

आम जनता को फार्मा कम्पनी के nexus और शोषण से बचाने के लिए एक तरफ डॉक्टर्स को जेनेरिक फार्मूला prescribe करने का निर्देश दिया गया है और वहीं दूसरी तरफ़ 600 से अधिक प्रकार की दवाइयां प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं एवम साथ ही जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है।

जागरुकता कार्यक्रम Awareness programmes : 27 मई 2012 को प्रसारित आमिर खान के प्रसिद्ध टीवी टॉक शो सत्यमेव जयते में Every life is precious (medical malpractices( का मुद्दा उठाने के बाद जेनेरिक और ब्रांडेड दवाई भारत के आम नागरिक के लिए बहस, सोंच और चर्चा का मुद्दा बनी। राजस्थान के IAS Doctor समित शर्मा जिन्होंने राजस्थान में जेनेरिक दवा दुकान खुलवाने के सार्थक प्रयास किया।


जैनरिक दवा (generic drug) वह दवा है जो बिना किसी पेटेंट के बनायी और वितरित की जाती है। जैनरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है किन्तु उसके सक्रिय घटक (active ingradient) पर पेटेंट नहीं होता। जैनरिक दवाईयां गुणवत्ता में किसी भी प्रकार से ब्राण्डेड दवाईयों से कम नहीं होतीं तथा ये उतनी ही असरकारक हैं, जितनी की ब्रांडेड दवाईयाँ। यहाँ तक कि उनकी मात्रा (डोज), क्रिया , सक्रिय तत्व आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के जैसे ही होते हैं। जैनरिक दवाईयों को बाजार में उतारने का लाईसेंस मिलने से पहले गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। उसके बाद ही इन्हें जनसामान्य के लिए उपलब्ध कराया जाता है।


इस लिंक से http://janaushadhi.gov.in/StoreDetails.aspx पूरे देश मे संचलित जनऔषधि केंद्र की सूची देखी जा सकती है तथा अन्य जानकारी ली जा सकती है।


प्रधानमंत्री जन औषधि योजना भारत के प्रधानमंत्री श्री ‪नरेन्द्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2015 को घोषित एक अच्छी योजना है। इस योजना में सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जैनरिक (Generic) दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम किए गए। और सरकार द्वारा 'जन औषधि स्टोर' बनाए गए हैं, जहां जेनरिक दवाईयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं, यह मेडिकल क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन था जो गरीब व असहाय लोगों की जरूरतों को देखकर किया गया था, आज पूरे भारत में लगभग तहसील स्तर पर जैनरिक मेडिसिन के यह जन औषधि स्टोर खुल चुके हैं। जनता को भी इस विषय पर जाग्रत होना होगा, डॉक्टरों से अधिक से अधिक जैनरिक मेडिसिन लिखने को कहें, जिससे मेडिकल खर्च की वजह से कोई परिवार बर्बाद ना हो।‬ भारत जैसे देश में जेनेरिक दवाइयों के बारे में जागरूकता बहुत आवश्यक है ताकि आवश्यक दवाइयां सभी की पहुँच में और सुलभ रहें।

अपना कीमती समय देकर पढ़ने के लिए धन्यवाद, शुक्रिया,

Thank you!

BY : Team The Better World , आप अपने कीमती सुझाव इस ईमेल के माध्यम से बता सकते हैं । TheBetterWorldindia@outlook.com

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